UN में भारत की मजबूत आवाज: महिला शांतिदूतों की भागीदारी बढ़ाने की वकालत, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में रखी अपनी बात

भारत ने सशस्त्र बलों और वैश्विक शांति मिशनों में महिलाओं की अधिक भागीदारी का जोरदार आह्वान किया है। भारत का कहना है कि महिलाओं की भागीदारी से संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा को अधिक मजबूती मिलेगी, जिससे संयुक्त राष्ट्र के ‘महिला, शांति और सुरक्षा’ (WPS) एजेंडे को गति मिलेगी।

UNSC की बैठक में भारत का बयान

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में ‘महिला, शांति और सुरक्षा’ विषय पर आयोजित खुली बहस के दौरान संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थाई प्रतिनिधि पी. हरीश ने एक रिपोर्ट का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि दुनिया भर में करीब 750 मिलियन (75 करोड़) महिलाएं और लड़कियां संघर्ष क्षेत्रों के 50 किलोमीटर के दायरे में रह रही हैं। इसके साथ ही, उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि एक साल के भीतर संघर्ष से जुड़ी यौन हिंसा के सत्यापित मामलों में दोगुनी से अधिक वृद्धि दर्ज की गई है।

भारतीय महिला अधिकारियों की सराहना

पी. हरीश ने दक्षिण सूडान में संयुक्त राष्ट्र मिशन (UNMISS) में तैनात भारतीय सेना के मेजर मोइज़ यासीन और मेजर सोनिया देवेंद्र निवस्कर के महत्वपूर्ण योगदान का जिक्र किया। इन महिला अधिकारियों ने महिला शांतिदूतों और आम नागरिकों की सुरक्षा, कल्याण और भागीदारी में सुधार के लिए उत्कृष्ट पहल की है।

रक्षा और राजनीति में भारत का बड़ा कदम

भारत की पहलों को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि देश ने अपनी सशस्त्र सेनाओं में महिलाओं के लिए अवसर बढ़ाए हैं, जिनमें स्थायी कमीशन (Permanent Commission) देना और सभी कॉम्बैट (युद्धक) भूमिकाओं में उनकी भर्ती शामिल है। इसके अलावा, उन्होंने ‘महिला आरक्षण अधिनियम, 2023’ (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) का भी उल्लेख किया, जो लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण प्रदान करता है। भारत का मानना है कि राजनीतिक और सुरक्षा निर्णयों में महिलाओं की समान भागीदारी ही टिकाऊ और स्थायी शांति की नींव है।

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